विटामिन D और B12: छिपी हुई कमियाँ
भारत में बहुत आम — और जाँच आसान।
भरपूर धूप के बावजूद भारत में विटामिन D की कमी बहुत आम है, और विटामिन B12 की कमी भी बहुत आम है — ख़ासकर शाकाहारियों में। दोनों से ऐसे धुँधले लक्षण होते हैं जिन्हें नज़रअंदाज़ करना आसान है, और दोनों की जाँच एक आसान ब्लड टेस्ट से हो जाती है।
विटामिन D
विटामिन D शरीर को कैल्शियम सोखने में मदद करता है और हड्डियों व मांसपेशियों को मज़बूत रखता है। ज़्यादातर दिन घर के अंदर रहने वाले, शरीर ज़्यादातर ढका रखने वाले, बुज़ुर्ग और ज़्यादा वज़न वाले लोगों में इसकी कमी आम है।
- संभावित लक्षण: हड्डियों या कमर में दर्द, मांसपेशियों में दर्द और कमज़ोरी, थकान, बार-बार बीमार पड़ना।
- परिणाम अक्सर इस तरह बाँटे जाते हैं: कमी (20 ng/mL से कम), अपर्याप्त (20–29) और पर्याप्त (30 या ज़्यादा), हालाँकि सीमाएँ लैब के अनुसार अलग हो सकती हैं।
विटामिन B12
B12 स्वस्थ नसों और लाल रक्त कोशिकाओं के लिए ज़रूरी है। यह मुख्य रूप से पशु-आधारित भोजन से मिलता है, इसलिए शाकाहारियों में ख़तरा ज़्यादा है। मेटफ़ॉर्मिन और लंबे समय तक एसिडिटी की दवाएँ भी B12 कम कर सकती हैं।
- संभावित लक्षण: हाथ-पैरों में झुनझुनी या सुन्नपन, कमज़ोरी, थकान, याददाश्त कमज़ोर होना, मुँह में छाले।
- B12 की कमी से एक तरह की खून की कमी भी हो सकती है।
क्या खाली पेट रहना ज़रूरी है?
विटामिन D या B12 टेस्ट के लिए आम तौर पर खाली पेट की ज़रूरत नहीं।
इलाज
अगर स्तर कम है, तो डॉक्टर सप्लीमेंट की सही खुराक और अवधि बताएँगे। कृपया ख़ुद से विटामिन D की ज़्यादा खुराक न लें — बहुत ज़्यादा लेना नुकसानदायक हो सकता है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
विटामिन D कितना सामान्य है?
कई लैब 30 ng/mL या ज़्यादा को पर्याप्त, 20–29 को अपर्याप्त और 20 से कम को कमी मानती हैं। आपकी रिपोर्ट में इस्तेमाल हुई सीमा लिखी होगी।
विटामिन B12 की कमी का ख़तरा किसे ज़्यादा है?
शाकाहारी, बुज़ुर्ग, और मेटफ़ॉर्मिन या लंबे समय तक एसिडिटी की दवा लेने वाले लोग।
क्या विटामिन D और B12 टेस्ट के लिए खाली पेट रहना ज़रूरी है?
आम तौर पर खाली पेट की ज़रूरत नहीं।
केवल सामान्य जानकारी, डॉक्टर की सलाह का विकल्प नहीं। आपात स्थिति में नज़दीकी अस्पताल जाएँ।